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Matthew 8 New King James Version (NKJV)

Jesus Cleanses a Leper

When He had come down from the mountain, great multitudes followed Him. And behold, a leper came and worshiped Him, saying, “Lord, if You are willing, You can make me clean.”

Then Jesus put out His hand and touched him, saying, “I am willing; be cleansed.” Immediately his leprosy was cleansed.

And Jesus said to him, “See that you tell no one; but go your way, show yourself to the priest, and offer the gift that Moses commanded, as a testimony to them.”

Jesus Heals a Centurion’s Servant

Now when Jesus had entered Capernaum, a centurion came to Him, pleading with Him, saying, “Lord, my servant is lying at home paralyzed, dreadfully tormented.”

And Jesus said to him, “I will come and heal him.”

The centurion answered and said, “Lord, I am not worthy that You should come under my roof. But only speak a word, and my servant will be healed. For I also am a man under authority, having soldiers under me. And I say to this one, ‘Go,’ and he goes; and to another, ‘Come,’ and he comes; and to my servant, ‘Do this,’ and he does it.

10 When Jesus heard it, He marveled, and said to those who followed, “Assuredly, I say to you, I have not found such great faith, not even in Israel! 11 And I say to you that many will come from east and west, and sit down with Abraham, Isaac, and Jacob in the kingdom of heaven. 12 But the sons of the kingdom will be cast out into outer darkness. There will be weeping and gnashing of teeth.” 13 Then Jesus said to the centurion, “Go your way; and as you have believed, so let it be done for you.” And his servant was healed that same hour.

Peter’s Mother-in-Law Healed

14 Now when Jesus had come into Peter’s house, He saw his wife’s mother lying sick with a fever. 15 So He touched her hand, and the fever left her. And she arose and served [a]them.

Many Healed in the Evening

16 When evening had come, they brought to Him many who were demon-possessed. And He cast out the spirits with a word, and healed all who were sick, 17 that it might be fulfilled which was spoken by Isaiah the prophet, saying:

He Himself took our infirmities
And bore our sicknesses.”

The Cost of Discipleship

18 And when Jesus saw great multitudes about Him, He gave a command to depart to the other side. 19 Then a certain scribe came and said to Him, “Teacher, I will follow You wherever You go.”

20 And Jesus said to him, “Foxes have holes and birds of the air have nests, but the Son of Man has nowhere to lay His head.”

21 Then another of His disciples said to Him, “Lord, let me first go and bury my father.”

22 But Jesus said to him, “Follow Me, and let the dead bury their own dead.”

Wind and Wave Obey Jesus

23 Now when He got into a boat, His disciples followed Him. 24 And suddenly a great tempest arose on the sea, so that the boat was covered with the waves. But He was asleep. 25 Then His disciples came to Him and awoke Him, saying, “Lord, save us! We are perishing!”

26 But He said to them, “Why are you fearful, O you of little faith?” Then He arose and rebuked the winds and the sea, and there was a great calm. 27 So the men marveled, saying, [b]“Who can this be, that even the winds and the sea obey Him?”

Two Demon-Possessed Men Healed

28 When He had come to the other side, to the country of the [c]Gergesenes, there met Him two demon-possessed men, coming out of the tombs, exceedingly fierce, so that no one could pass that way. 29 And suddenly they cried out, saying, “What have we to do with You, Jesus, You Son of God? Have You come here to torment us before the time?”

30 Now a good way off from them there was a herd of many swine feeding. 31 So the demons begged Him, saying, “If You cast us out, [d]permit us to go away into the herd of swine.”

32 And He said to them, “Go.” So when they had come out, they went into the herd of swine. And suddenly the whole herd of swine ran violently down the steep place into the sea, and perished in the water.

33 Then those who kept them fled; and they went away into the city and told everything, including what had happened to the demon-possessed men. 34 And behold, the whole city came out to meet Jesus. And when they saw Him, they begged Him to depart from their region.

Footnotes:

  1. Matthew 8:15 NU, M Him
  2. Matthew 8:27 Lit. What sort of man is this
  3. Matthew 8:28 NU Gadarenes
  4. Matthew 8:31 NU send us into
New King James Version (NKJV)

Scripture taken from the New King James Version®. Copyright © 1982 by Thomas Nelson. Used by permission. All rights reserved.

मत्ती 8 Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)

यीशु का कोढ़ी को ठीक करना

(मरकुस 1:40-45; लूका 5:12-16)

यीशु जब पहाड़ से नीचे उतरा तो बहुत बड़ा जन समूह उसके पीछे हो लिया। वहीं एक कोढ़ी भी था। वह यीशु के पास आया और उसके सामने झुक कर बोला, “प्रभु, यदि तू चाहे तो मुझे ठीक कर सकता है।”

इस पर यीशु ने अपना हाथ बढ़ा कर कोढ़ी को छुआ और कहा, “निश्चय ही मैं चाहता हूँ ठीक हो जा!” और तत्काल कोढ़ी का कोढ़ जाता रहा। फिर यीशु ने उससे कहा, “देख इस बारे में किसी से कुछ मत कहना। पर याजक के पास जा कर उसे अपने आप को दिखा। फिर मूसा के आदेश के अनुसार भेंट चढ़ा ताकि लोगों को तेरे ठीक होने की साक्षी मिले।”

उससे सहायता के लिये विनती

(लूका 7:1-10; यूहन्ना 4:43-54)

फिर यीशु जब कफरनहूम पहुँचा, एक रोमी सेनानायक उसके पास आया और उससे सहायता के लिये विनती करता हुआ बोला, “प्रभु, मेरा एक दास घर में बीमार पड़ा है। उसे लकवा मार दिया है। उसे बहुत पीड़ा हो रही है।”

तब यीशु ने सेना नायक से कहा, “मैं आकर उसे अच्छा करूँगा।”

सेना नायक ने उत्तर दिया, “प्रभु मैं इस योग्य नहीं हूँ कि तू मेरे घर में आये। इसलिये केवल आज्ञा दे दे, बस मेरा दास ठीक हो जायेगा। यह मैं जानता हूँ क्योंकि मैं भी एक ऐसा व्यक्ति हूँ जो किसी बड़े अधिकारी के नीचे काम करता हूँ और मेरे नीचे भी दूसरे सिपाही हैं। जब मैं एक सिपाही से कहता हूँ ‘जा’ तो वह चला जाता है और दूसरे से कहता हूँ ‘आ’ तो वह आ जाता है। मैं अपने दास से कहता हूँ कि ‘यह कर’ तो वह उसे करता है।”

10 जब यीशु ने यह सुना तो चकित होते हुए उसने जो लोग उसके पीछे आ रहे थे, उनसे कहा, “मैं तुमसे सत्य कहता हूँ मैंने इतना गहरा विश्वास इस्राएल में भी किसी में नहीं पाया। 11 मैं तुम्हें यह और बताता हूँ कि, बहुत से पूर्व और पश्चिम से आयेंगे और वे भोज में इब्राहीम, इसहाक और याकूब के साथ स्वर्ग के राज्य में अपना-अपना स्थान ग्रहण करेंगे। 12 किन्तु राज्य की मूलभूत प्रजा बाहर अंधेरे में धकेल दी जायेगी जहाँ वे लोग चीख-पुकार करते हुए दाँत पीसते रहेंगे।”

13 तब यीशु ने उस सेनानायक से कहा, “जा वैसा ही तेरे लिए हो, जैसा तेरा विश्वास है।” और तत्काल उस सेनानायक का दास अच्छा हो गया।

यीशु का बहुतों को ठीक करना

(मरकुस 1:29-34; लूका 4:38-41)

14 यीशु जब पतरस के घर पहुँचा उसने पतरस की सास को बुखार से पीड़ित बिस्तर में लेटे देखा। 15 सो यीशु ने उसे अपने हाथ से छुआ और उसका बुखार उतर गया। फिर वह उठी और यीशु की सेवा करने लगी।

16 जब साँझ हुई, तो लोग उसके पास बहुत से ऐसे लोगों को लेकर आये जिनमें दुष्टात्माएँ थीं। अपनी एक ही आज्ञा से उसने दुष्टात्माओं को निकाल दिया। इस तरह उसने सभी रोगियों को चंगा कर दिया। 17 यह इसलिये हुआ ताकि परमेश्वर ने भविष्यवक्ता यशायाह द्वारा जो कुछ कहा था, पूरा हो:

“उसने हमारे रोगों को ले लिया और हमारे संतापों को ओढ़ लिया।”

यीशु का अनुयायी बनने की चाह

(लूका 9:57-62)

18 यीशु ने जब अपने चारों ओर भीड़ देखी तो उसने अपने अनुयायियों को आज्ञा दी कि वे झील के परले किनारे चले जायें। 19 तब एक यहूदी धर्मशास्त्री उसके पास आया और बोला, “गुरु, जहाँ कहीं तू जायेगा, मैं तेरे पीछे चलूँगा।”

20 इस पर यीशु ने उससे कहा, “लोमड़ियों की खोह और आकाश के पक्षियों के घोंसले होते हैं किन्तु मनुष्य के पुत्र के पास सिर टिकाने को भी कोई स्थान नहीं है।”

21 और उसके एक शिष्य ने उससे कहा, “प्रभु, पहले मुझे जाकर अपने पिता को गाड़ने की अनुमति दे।”

22 किन्तु यीशु ने उससे कहा, “मेरे पीछे चला आ और मरे हुवों को अपने मुर्दे आप गाड़ने दे।”

यीशु का तूफान को शांत करना

(मरकुस 4:35-41; लूका 8:22-25)

23 तब यीशु एक नाव पर जा बैठा। उसके अनुयायी भी उसके साथ थे। 24 उसी समय झील में इतना भयंकर तूफान उठा कि नाव लहरों से दबी जा रही थी। किन्तु यीशु सो रहा था। 25 तब उसके अनुयायी उसके पास पहुँचे और उसे जगाकर बोले, “प्रभु हमारी रक्षा कर। हम मरने को हैं!”

26 तब यीशु ने उनसे कहा, “अरे अल्प विश्वासियों! तुम इतने डरे हुए क्यों हो?” तब उसने खड़े होकर तूफान और झील को डाँटा और चारों तरफ़ शांति छा गयी।

27 लोग चकित थे। उन्होंने कहा, “यह कैसा व्यक्ति है? आँधी तूफान और सागर तक इसकी बात मानते हैं!”

दो व्यक्तियों का दुष्टात्माओं से छुटकारा

(मरकुस 5:1-20; लूका 8:26-39)

28 जब यीशु झील के उस पार, गदरेनियों के देश पहुँचा, तो उसे कब्रों से निकल कर आते दो व्यक्ति मिले, जिनमें दुष्टात्माएँ थीं। वे इतने भयानक थे कि उस राह से कोई निकल तक नहीं सकता था। 29 वे चिल्लाये, “हे परमेश्वर के पुत्र, तू हमसे क्या चाहता है? क्या तू यहाँ निश्चित समय से पहले ही हमें दंड देने आया है?”

30 वहाँ कुछ ही दूरी पर बहुत से सुअरों का एक रेवड़ चर रहा था। 31 सो उन दुष्टात्माओं ने उससे विनती करते हुए कहा, “यदि तुझे हमें बाहर निकालना ही है, तो हमें सुअरों के उस झुंड में भेज दे।”

32 सो यीशु ने उनसे कहा, “चले जाओ।” तब वे उन व्यक्तियों में से बाहर निकल आए और सुअरों में जा घुसे। फिर वह समूचा रेवड़ ढलान से लुढ़कते, पुढ़कते दौड़ता हुआ झील में जा गिरा। सभी सुअर पानी में डूब कर मर गये। 33 सुअर के रेवड़ों के रखवाले तब वहाँ से दौड़ते हुए नगर में आये और सुअरों के साथ तथा दुष्ट आत्माओं से ग्रस्त उन व्यक्तियों के साथ जो कुछ हुआ था, कह सुनाया। 34 फिर तो नगर के सभी लोग यीशु से मिलने बाहर निकल पड़े। जब उन्होंने यीशु को देखा तो उससे विनती की कि वह उनके यहाँ से कहीं और चला जाये।

Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)

© 1995, 2010 Bible League International

マタイの福音書 8 Japanese Living Bible (JLB)

病気を治す

イエスが山を降りると、大ぜいの群衆がついて来ました。

その時です。ツァラアト(皮膚が冒され、汚れているとされた当時の疾患)の人が一人、イエスに駆け寄り、足もとにひれ伏しました。「先生。お願いですから、私を治してください。お気持ちひとつで、治すことがおできになるのですから。」

イエスはその男にさわり、「そうしてあげましょう。さあ、よくなりなさい」と言われました。するとたちまち、ツァラアトはあとかたもなくきれいに治ってしまいました。

「さあ、まっすぐ祭司のところに行き、体を調べてもらいなさい。モーセの律法にあるとおり、ツァラアトが治った時のささげ物をしなさい。完全に治ったことを人々の前で証明するのです。」

5-6 イエスがカペナウムの町に入られると、ローマ軍の隊長がやって来て、「先生。うちの若い召使が中風で苦しんでおります。とてもひどく、起き上がることもできません。どうか治してやってください。お願いします」としきりに頼みました。

「わかりました。では、行って治してあげましょう」とイエスは承知されました。

ところが、隊長の返事はこうでした。「先生。私には、あなたを家にお迎えするだけの資格はありません。わざわざ来ていただかなくても、ただこの場で、『治れ』と言ってくださるだけでけっこうです。そうすれば、召使は必ず治ります。 と申しますのは、私も上官に仕える身ですが、私の下にも部下が大ぜいおります。その一人に私が『行け』と言えば行きますし、『来い』と言えば来ます。また奴隷に『あれをやれ。これをやれ』と命じると、そのとおりにします。私にさえそんな権威があるのですから、先生の権威で、病気に『出て行け』とお命じになれば、必ず治るはずです。」

10 イエスはたいへん驚き、群衆のほうをふり向いて言われました。「これほど信仰深い人は、イスラエル中でも見たことがありません。 11 いいですか、皆さん。やがて、この人のような外国人がたくさん世界中からやって来て、神の国で、アブラハム、イサク、ヤコブといっしょに席に着くでしょう。 12 ところが、神の国はもともとイスラエル人のために準備されたのに、多くのイスラエル人が入りそこねて、外の暗闇に放り出され、泣いてくやしがることになるのです。」

13 それから、ローマ軍の隊長に、「さあ、家に帰りなさい。あなたの信じたとおりのことが起こっています」と言われました。そして、ちょうどその時刻、召使の病気はいやされていたのです。

14 イエスがペテロの家に行かれると、ペテロのしゅうとめが、高熱でうなされていました。 15 ところが、イエスがその手におさわりになると、たちまち熱がひき、彼女は起き出して、みんなの食事のしたくを始めました。

16 その夕方のことです。悪霊につかれた人たちが、イエスのところに連れて来られました。イエスがただひとことお命じになると、たちまち悪霊どもは逃げ出し、病人はみな治りました。 17 こうして、イエスについてイザヤが、「彼は、私たちの痛みを身に引き受け、私たちの病を負った」イザヤ53・4と預言したとおりになったのです。

嵐を静める

18 イエスは、自分を取り巻く群衆の数がだんだんふくれ上がっていくのに気づき、湖を渡る舟の手配を弟子たちにお命じになりました。

19 ちょうどその時、ユダヤ教の教師の一人が、「先生。あなたがどこへ行かれようと、ついてまいります」と申し出ました。

20 しかし、イエスは言われました。「きつねにも穴があり、鳥にも巣があります。しかし、メシヤ(救い主)のわたしには、自分の家はおろか、横になる所もありません。」

21 また、ある弟子は、「先生。ごいっしょするのは、父の葬式を終えてからにしたいのですが」と言いました。

22 けれどもイエスは、「いや、今いっしょに来なさい。死んだ人のことは、あとに残った者たちに任せておけばいいのです」とお答えになりました。

23 それから、イエスと弟子たちの一行は舟に乗り込み、湖を渡り始めました。 24 すると突然、激しい嵐になりました。舟は今にも、山のような大波にのまれそうです。ところが、イエスはぐっすり眠っておられました。

25 弟子たちはあわてて、イエスを揺り起こし、「主よ。お助けください。舟が沈みそうです」と叫びました。

26 するとイエスは、「そんなにこわがるとは、それでも神を信じているのですか」と答えると、ゆっくり立ち上がり、風と波をおしかりになりました。するとどうでしょう。嵐はぴたりとやみ、大なぎになったではありませんか。 27 弟子たちは恐ろしさのあまり、その場に座り込み、「なんというお方だろう。風や湖までが従うとは」と、ささやき合いました。

28 やがて、舟は湖の向こう岸に着きました。ガダラ人の住む地方です。と、そこに二人の男がやって来ました。実はこの二人は悪霊に取りつかれ、墓場をねぐらにしている人たちでした。何をされるかわかったものではないので、だれもそのあたりには近寄りませんでした。

29 二人は、イエスに向かって大声でわめき立てました。「おれたちをどうしようというんだ。確かに、おまえは神の子だ。だが、今はまだ、おれたちを苦しめる権利はないはずだ。」

30 ところで、ずっと向こうのほうでは、豚の群れが放し飼いになっていました。 31 そこで悪霊たちは、「もし、おれたちを追い出すのなら、あの豚の群れの中に入れてくれ」と頼みました。

32 イエスが、「よし、出て行け」とお命じになると、悪霊たちは男たちから出て、豚の中に入りました。そのとたん、豚の群れはまっしぐらに走りだし、湖めがけていっせいにがけを駆け降り、おぼれ死んでしまいました。 33 びっくりした豚飼いたちが近くの町に逃げ込み、事の一部始終を知らせると、 34 町中の者が押しかけ、「これ以上迷惑をかけてもらいたくないから、この地を立ち去ってくれ」とイエスに頼みました。

Japanese Living Bible (JLB)

Copyright© 1978, 2011, 2016 by Biblica, Inc.® Used by permission. All rights reserved worldwide.

마태복음 8 Korean Living Bible (KLB)

여러 가지 병을 고치심

예수님이 산에서 내려오시자 많은 군중이 뒤따랐다.

마침 한 문둥병자가 예수님께 와서 절하며 “주님, 주님께서 원하시면 저를 깨끗이 고치실 수 있습니다” 하였다.

예수님이 그에게 손을 대시며 “내가 원한다. 깨끗이 나아라” 하고 말씀하시자 즉시 그의 문둥병이 나았다.

그때 예수님은 그에게 “너는 아무에게도 이 일을 말하지 말고 제사장에게 가서 네 몸을 보이고 모세가 명령한 예물을 드려 네가 깨끗해진 것을 사람들에게 증거하여라” 하고 말씀하셨다.

예수님이 가버나움에 가셨을 때 한 [a]장교가 예수님께 와서 도움을 구하며

“주님, 제 하인이 중풍에 걸려 몹시 고생하고 있습니다” 라고 하였다.

예수님이 그에게 “내가 가서 고쳐 주겠다” 하시자

장교는 이렇게 대답하였다. “주님, 저는 주님을 제 집에까지 오시게 할 만한 자격이 없습니다. 그저 나으라는 말씀만 한마디 해 주십시오. 그러면 제 하인이 나을 것입니다.

저도 윗사람을 모시고 있고 제 아래에도 부하들이 있어서 제가 부하에게 ‘가라’ 하면 가고 ‘오라’ 하면 오고 제 하인에게 ‘이 일을 하라’ 하면 합니다.”

10 예수님은 이 말에 놀라시며 따라온 사람들에게 말씀하셨다. “내가 분명히 말하지만 이스라엘 온 땅에서 이만한 믿음을 가진 사람을 만나 보지 못하였다.

11 또 너희에게 말한다. 동서 사방에서 [b]많은 이방인들이 모여들어 하늘 나라에서 아브라함과 이삭과 야곱과 함께 잔치 자리에 앉을 것이다.

12 그러나 [c]유대인들은 바깥 어두운 곳으로 쫓겨나 통곡하며 이를 갈 것이다.”

13 그러고서 예수님은 장교에게 “가거라. 네 믿음대로 될 것이다” 하고 말씀하셨다. 그러자 바로 그 시각에 그의 하인이 나았다.

14 예수님이 베드로의 집에 들어가 그의 장모가 열병으로 누워 있는 것을 보시고

15 그 손을 만지시자 열병은 떠나고 그 여자는 일어나 예수님의 시중을 들었다.

16 날이 저물었을 때 사람들이 귀신 들린 많은 사람들을 예수님께 데려왔다. 그래서 예수님은 말씀으로 귀신들을 쫓아내고 병자들을 다 고쳐 주셨다.

17 이것은 예언자 이사야의 다음과 같은 예언을 이루기 위해서였다. [d]“그는 우리의 연약함을 몸소 담당하시고 우리의 질병을 짊어지셨다.”

예수님을 따르는 사람의 각오

18 예수님은 군중들이 자기 주위에 모여드는 것을 보시고 호수 저편으로 건너가자고 하셨다.

19 그때 한 율법학자가 예수님께 와서 “선생님, 저는 선생님이 어디로 가시든지 따라가겠습니다” 하였다.

20 그래서 예수님은 그에게 “여우도 굴이 있고 공중의 새도 보금자리가 있다. 그러나 [e]나는 머리 둘 곳이 없다” 하고 말씀하셨다.

21 그러자 제자 중에 한 사람이 예수님께 “주님, 먼저 가서 제 아버지의 장례를 치르도록 허락해 주십시오” 하였다.

22 그러나 예수님은 그에게 “죽은 사람의 장례는 [f]영적으로 죽은 사람들이 치르게 버려 두고 너는 나를 따르라” 하고 말씀하셨다.

폭풍을 잔잔케 하심

23 그리고 예수님이 배를 타시자 제자들도 뒤따랐다.

24 그런데 갑자기 바다에 큰 폭풍이 휘몰아쳐서 배가 침몰하게 되었다. 그러나 예수님은 주무시고 계셨다.

25 제자들은 예수님을 깨우며 “주님, 살려 주십시오. 우리가 죽게 되었습니다” 하고 부르짖었다.

26 예수님이 제자들에게 “왜 무서워하느냐? 믿음이 적은 사람들아!” 하시고 일어나 바람과 바다를 꾸짖으시자 바다가 아주 잔잔해졌다.

27 사람들은 놀라 “도대체 이분이 누구이기에 바람과 바다도 복종하는가?” 하고 수군거렸다.

28 예수님이 호수 건너편 가다라 지방에 가시자 귀신 들린 두 사람이 무덤 사이에서 나와 예수님과 마주치게 되었다. 그들은 너무 사나워 아무도 그 길로 지나갈 수 없었다.

29 그런데 귀신 들린 사람들이 갑자기 “하나님의 아들이여, 우리가 당신과 무슨 상관이 있습니까? 정한 때가 되기도 전에 우리를 괴롭히려고 오셨습니까?” 하고 외쳤다.

30 마침 거기서 약간 떨어진 곳에 많은 돼지떼가 풀을 먹고 있었다.

31 귀신들은 예수님께 “우리를 내어쫓으시려거든 저 돼지떼 속에라도 들여보내 주십시오” 하고 간청하였다.

32 예수님이 “좋다. 가거라” 하시자 귀신들이 나와서 돼지떼 속으로 들어갔다. 그러자 갑자기 돼지떼가 모두 가파른 비탈로 내리달려 호수에 빠져 죽고 말았다.

33 돼지를 치던 자들이 달아나 마을에 들어가서 이 일과 귀신 들린 사람들에게 일어난 모든 일을 말하자

34 온 마을 사람들이 뛰어나와 예수님을 보고 그 지방에서 떠나 달라고 간청하였다.

Footnotes:

  1. 8:5 원문에는 ‘백부장’ (로마군 100명의 지휘관)
  2. 8:11 또는 ‘많은 사람들이’
  3. 8:12 또는 ‘나라의 본 자손들은’
  4. 8:17 사53:4
  5. 8:20 원문에는 ‘인자’ (사람의 아들)
  6. 8:22 원문에는 그냥 ‘죽은 사람들’
Korean Living Bible (KLB)

Copyright © 1985 by Biblica, Inc.® Used by permission. All rights reserved worldwide.

马太福音 8 Chinese Contemporary Bible (Simplified) (CCB)

麻风病痊愈

耶稣下山的时候,有许多人跟着。 有一个患麻风病的人跑来跪在祂跟前,说:“主啊,如果你肯,一定能使我洁净。”

耶稣伸手摸他,说:“我肯,你洁净了吧!”那人的麻风病就立刻洁净了。

耶稣对他说:“不要把这事告诉别人,要去让祭司察看你的身体,并且照摩西的规定献祭,向众人证明你已经洁净了。”

百夫长的信心

耶稣到了迦百农,一个百夫长前来向祂求助,说: “主啊,我的仆人瘫痪,躺在家里,非常痛苦。”

耶稣说:“我这就去医治他。”

百夫长说:“主啊,我不配让你亲自来我家。你只要说一句话,我仆人就会痊愈。 因为我有上司,也有部下。我命令我的部下去,他就去;要他来,他就来。我吩咐仆人做什么事,他一定照办。”

10 耶稣听了,感到惊奇,便对跟随祂的人说:“我实在告诉你们,我在以色列从未见过信心这么大的人。 11 我告诉你们,将来有许多从东从西来的人会在天国与亚伯拉罕、以撒和雅各一同欢宴。 12 但那些本应承受天国的人反会被赶出去,在黑暗里哀哭切齿。”

13 耶稣对百夫长说:“你回去吧!就照你所信的给你成就。”就在那时候,他的仆人便痊愈了。

治病赶鬼

14 耶稣来到彼得家,看见彼得的岳母正在发烧,躺在床上。 15 耶稣一摸她的手,烧就退了。她便起来服侍耶稣。

16 当天晚上,有人带着许多被鬼附身的人来见耶稣。耶稣一句话就把鬼赶出去了,并医好了所有的病人。 17 这是要应验以赛亚先知的话:“祂担当了我们的软弱,背负了我们的疾病。”

跟从耶稣的代价

18 耶稣看到人群围着祂,就吩咐门徒渡到湖对岸。 19 这时,有一位律法教师上前对耶稣说:“老师,无论你往哪里去,我都要跟从你。”

20 耶稣说:“狐狸有洞,飞鸟有窝,人子却没有安枕之处。”

21 另一个门徒对耶稣说:“主啊,请让我先回去安葬我的父亲。” 22 耶稣对他说:“跟从我,让死人去埋葬他们的死人吧!”

平静风浪

23 耶稣上了船,门徒也跟着祂上了船。 24 忽然,湖面上狂风大作,波涛汹涌,船快要被巨浪吞没,耶稣却在睡觉。

25 门徒连忙叫醒耶稣,说:“主啊,救命!我们快淹死了!”

26 耶稣答道:“你们的信心太小了,为什么害怕呢?”于是祂起来斥责风和浪,风浪就完全平静了。

27 门徒很惊奇,说:“祂究竟是什么人?连风浪都听祂的!”

治好两个被鬼附身的人

28 耶稣到了对岸加大拉[a]人的地方,有两个被鬼附身的人从坟地里出来见祂。他们非常凶恶,没有人敢从那里经过。 29 他们喊着说:“上帝的儿子啊!我们和你有什么关系?时候还没有到,你就来叫我们受苦吗?”

30 当时,有一大群猪在附近吃食。 31 鬼就哀求耶稣:“如果你要赶我们出去,就让我们进入猪群吧!”

32 耶稣说:“去吧!”

于是,鬼从那二人身上出来,进入猪群,整群猪就一路奔下陡坡,冲进湖里淹死了。 33 放猪的人逃进城,把事情的经过以及被鬼附身者的遭遇告诉了城里的人。 34 于是,全城的人都出来见耶稣,见到后,便请求祂离开那地方。

Footnotes:

  1. 8:28 加大拉”即格拉森地区。
Chinese Contemporary Bible (Simplified) (CCB)

Chinese Contemporary Bible Copyright © 1979, 2005, 2007, 2011 by Biblica® Used by permission. All rights reserved worldwide.

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